संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
पृष्ठ 210, कुल 267 में से
संदर्भ में पढ़ेंगुलाल साहिब २०१
एकै बिंद एक भग द्वारा । एकै सब घट बोलनहारा ॥३॥
कौम छतीस एकही जाती । ब्रह्मबीज सब की उतपाती॥४
एकै कुल एकै परिवारा । ब्रह्मबीज का सकल पसारा ॥५॥
ऊँच नीच इस बिधि है लोई । कर्म कुकर्म कहावै दोई ॥६॥
गरीबदास जिन नाम पिछाना। ऊँच नीच पद ये परमाना॥७
गुलाल साहिब
[संक्षिप्त जीवन-चरित्र के लिये देखो संतवानी संग्रह भाग १ पृष्ठ २०८]
॥ नाम ॥
नाम रस अमरा है भाई, कोउ साध संगति तैं पाई ॥टेक॥
बिन घोटे बिन छाने पीवे, कौड़ी दाम न लाई ।
रंग रँगीले चढ़त रसीले, कवहौँ उतरि न जाई ॥ १ ॥
छके छकाये पगे पगाये, झूमि झूमि रस लाई ।
बिमल बिमल बानी गुन बोलै, अनुभव अमल चलाई ॥२॥
जहँ जहँ जावै थिर नहिँ आवै, खोल¹ अमल लै धाई ।
जल पत्थल पूजन करि मानत, फोकट गाढ़ बनाई² ॥३॥
गुरु परताप कृपा तैं पावै, घट भरि प्याल³ फिराई ।
कहै गुलाल मगन ह्वै बैठे, भगिहै हमरि बलाई ॥४॥
॥ अनहद शब्द ॥
रे मन नामहिँ सुमिरन करै ।
अजपा जाप हृदय लै लावो, पाँच पच्चीसो तीन मरै ॥१॥
(१) थोथा। (२) सैंत में गढ़ के बनाया है। (३) प्याला।
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