संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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२०० शब्द संग्रह
त्रिकुटी महल मैं आसन मारो, जहँ न चलै जम जोरा ।
दास गरीब भक्ति को कीजो, हुआ जात है भोरा१ ॥३॥
(२)
राम सुमिर राम सुमिर, राम सुमिर लै रे ।
जम और जहान जीत, तीन लोक जै रे ॥१॥
इन्द्री अदालत चोर, पकड़ो मन अहि२ रे ।
अनहद टंकोर घोर, सुनै व्यूँ न बहिरे ॥२॥
सुरत निरत नाद बिंद, मन पवना गहि रे ।
उनमुनी अलेल३ रूप, निराकार लहि रे ॥३॥
धनुष४ ध्यान मार बान५, दुरजन से फहिरे६ ।
देखत के सीत कोट, भरम बुर्ज ढहि रे ॥४॥
साचे से प्रीत कीन, झूठा मन महि७ रे ।
कहत है गरीबदास, कुटिल बचन सहि रे ॥५॥
(३)
मग८ पूछत हैं परतीत नहीं, वादी६ बादी१० झगड़ा ठानैं ।
मुकता जुगुता नहिं राह ल