संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६६ शब्द संग्रह
दम को डोरा खोज दरीबा¹ खूब है ।
अगर दीप सतलोक अजब महबूब है ॥ ४ ॥
सुता² पुत्र गृह नारि छार सब गात रे ।
का सूँ लाया नेह संग नहिँ साथ रे ॥ ५ ॥
हंस अकेला जाय हिरंबर हेत रे ।
सबद हमारा मान नाम निज चेत रे ॥ ६ ॥
कोतल घोड़े पीनस³ रथ सँग पालकी ।
गज गैबर⁴ दल ठाठ निसानी काल की ॥ ७ ॥
हक हलाल पहिचान बदी कर दूर रे ।
यह मुरगी रब रूह गऊ क्या सूर⁵ रे ॥ ८ ॥
तीतर चिड़ी बटेर भखे हलवान रे ।
मुल्ला बाँग पुकार अलह रहमान रे ॥ ६ ॥
रंमजानी रमजान घास चोखा दिया ।
पकड़ पछाड़ी रूह कहो यह क्या किया ॥ १० ॥
खूनी खून मँझार खाल क्यूँ काढ़ता ।
देखै रब रहमान गला क्यूँ बाढ़ता⁶ ॥ ११ ॥
ऐसे बूड़ै नाव होत हैं गरक रे ।
हरे हाँ रे कहता दास गरीब नाम निज परख रे ॥१२
अरिल
(३)
यह सौदा सतभाय⁷ करो परभात रे ।
तन मन रतन अमोल बटाऊ⁸ साथ रे ॥ १ ॥
बिछुर जायँगे मीत मता सुन लीजिये ।
बहुर न मेला होय कहो क्या कीजिये ॥ २ ॥
(१) झोपड़ा । (२) बेटी । (३) एक तरह की छोटी पालकी । (४) हाथियों का
झुंड । (५) सूअर । (६) काटता । (७) सत्त भाव । (८) डाकू ।