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संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

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गरीबदास जी २७५
गुरु को अहि निसि१ ध्यान जो करिये ।
विधिवत सेवा मैं अनुसरिये२ ॥ ८ ॥
तन मन सूँ आज्ञा मैं रहिये ।
गुरु आज्ञा बिन कछू न करिये ॥ ९ ॥
———
गरीबदास जी
[संक्षिप्त जीवन-चरित्र के लिये देखो संतबानी संग्रह भाग १ पृष्ठ १८१ ]
—:०:—
॥ चितावनी ॥
(१)
सुनिये संत सुजान, गरब नहिँ करना रे ॥ टेक ॥
चार दिनाँ की चिहर३ बनी है, आखिर तो कूँ मरना रे॥१
तू जाने मेरि ऐसी निभेगी, हर दम लेखा भरना रे ॥२॥
खाय ले पी ले बिलस ले हंसा, जोरि जोरि नहिँ धरना रे ॥३
दास गरीब सकल मैं साहिब, नहीं किसी सूँ अड़ना रे॥४
अरिल
(२)
मरदाने मरि जाहिँ मनी पर मार है ।
ऐसा महल अनूप पलक मैं छार है ॥ १ ॥
जोरा४ बुरी बलाय जीव जग भूँच५ है ।
पलक पहर छिन माहिँ नगारा कूँच है ॥ २ ॥
सुरत सोहंगम नेस पेस है बावरे ।
बदी बिदारो६ बेग धनी कूँ ध्याव रे ॥ ३ ॥
———
(१) दिन रात । (२) लगिये । (३) चिड़ियों के किलोल की जगह जो साँझ पड़े
बसेरे को उड़ जाती ह । (४) जुल्म । (५) गँवार । (६) फाड़ डालो, नाश करौ ।