सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 20, कुल 267 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 20

कबीर साहिब ११
(३)
मिलना कठिन है, कैसे मिलौंगी पिय जाय ॥टेक॥
समझि सोचि पग धरौं जतन से, बार बार डिग जाय ।
ऊँची गैल राह रपटीली, पाँव नहीं ठहराय ॥१॥
लोक लाज कुल की मरजादा, देखत मन सकुचाय ।
नैहर वास बसौं पीहर मैं, लाज तजी नहिं जाय ॥२॥
अधर भूमि जहँ महल पिया का, हम पै चढ़ो न जाय ।
धन भइ बारी पुरुप भये भोला, सुरत झकोला खाय ॥३॥
दूतो सतगुरु मिले बीच मैं, दीन्हो भेद बताय ।
दास कबीर पिया से भेंटे, सीतल कंठ लगाय ॥४॥
(४)
कौन मिलावै मोहिँ जोगिया हो, जोगिया बिन रह्यो न जाय ॥टेक॥
हौँ१ हिरनी पिय पारधी२ हो, मारे सबद के बान ।
जाहि लगो सो जानही हो, और दरद नहिँ जान ॥१॥
मैं प्यासी हौँ पीव की हो, रटत सदा पिव पीव ।
पिया मिले तो जीव है, ना तो सहजै त्यागौँ जीव ॥२॥
पिय कारन पियरी भई हो, लोग कहै तन रोग ।
छः छः लंघन मैं करौं रे, पिया मिलन के जोग ॥३॥
कह कबीर सुन जोगिनी हो, तन मैं मनहिँ मिलाय ।
तुम्हरी प्रीति के कारने हो, बहुरि मिलैंगे आय ॥४॥
(५)
होली
ये अँखियाँ अलसानी हो, पिय सेज चलो ॥ टेक ॥
खंभ पकरि पतंग अस डोलै, बोलै मधुरी बानी ॥१॥
फूलन सेज बिछाय जो राख्यो, पिया बिना कुम्हिलानी ॥२॥
(१) मैं । (२) शिकारी ।