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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 19, कुल 267 में से

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पृष्ठ 19

१० शब्द संग्रह
जैसे कामिनि भरे कूप जल, कर छोड़े बतरावै¹।
अपना रँग सखियन सँग राचै, सुरति गगर पर लावै ॥४॥
जैसे, सती चढ़ी सर² ऊपर, अपनी काया जरावै।
मातु पिता सब कुटुंब तियागै, सुरति पिया पर लावै ॥५॥
धूप दीप नैबेद अरगजा, ज्ञान की आरत लावै।
कहै कबीर सुनो भाई साधो, फेर जनम नहिँ पावै ॥६॥
॥ विरह ॥
(१)
बालम आओ हमारे गेह रे, तुम बिन दुखिया देह रे॥टे० ।
सब कोइ कहै तुम्हारी नारी, मो को यह संदेह रे।
एकमेक ह्वै सेज न सोवै, तब लगि कैसा सनेह रे ॥ १ ॥
अन्न न भावै नींद न आवै, गृह बन धरै न धीर रे।
ज्यौँ कामी को कामिनि प्यारी, ज्यौँ प्यासे को नीर रे ॥२
है कोइ ऐसा परउपकारी, पिय से कहै सुनाय रे।
अब तो बेहाल कबीर भयो है, बिन देखे जिव जाय रे ॥३
(२)
प्रीति लगी तुम नाम की, पल बिसरै नाहीं।
नजर करो अब मिहर की, मोहिँ मिलौ गुसाईँ ॥ १॥
बिरह सतावै मोहिँ को, जिव तड़पै मेरा।
तुम देखन की चाव है, प्रभु मिलौ सबेरा ॥ २ ॥
नैना तरसै दरस को, पल पलक न लागै।
दर्दवंद दीदार का, निसि बासर जागै ॥ ३ ॥
जो अब के प्रीतम मिलैँ, करूँ निमिख³ न न्यारा।
अब कबीर गुरु पाइया, मिला प्रान पियारा ॥ ४ ॥
(१) बात करती है। (२) आग, चिता। (३) छिन भर।