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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 197, कुल 267 में से

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पृष्ठ 197

१८८ शब्द संग्रह
॥ विरह ॥
कद मिलसी मैं बिरहौँ सताई नूँ ॥ टेक ॥
आप न आवे नाँ लिख भेजे, भट्ठि अजे ही लाई नूँ१॥१॥
तैं जेहा२ कोइ होर३ नाँ जाणा, मैं तनि सूल सवाई नूँ ॥२॥
रात दिनैं आराम न मैं नूँ, खावे बिरह कसाई नूँ ॥३॥
बुल्ले साह धृग४ जीवन मेरा, जौँ लग दरस दिखाई नूँ ॥४॥
॥ प्रेम ॥
(१)
घूँघट चक५ प्यारे, हुन६ सरमाँ केहियाँ रखियाँ वे७ ॥टेक॥
प्रीत लगा के मन हर लीना, फिर तैं अपना दरस न दीना ।
जहर पियाला आपे पीना, सी मैं अक्कलोँ कच्चियाँ वे८ ॥१॥
ज़ुलफ कुँडल ने घेरा पाया, बिसियर९ हो के डंक चलाया ।
तै नूँ देख तरस ना आया, मैं इसक तेरे ने पटियाँ वे१० ॥२॥
प्रेम कटारी कस कर मारी, हुन मैं होइयाँ बेदल११ भारी ।
तैँ ताँ सार१२ न लई हमारी, लाके खूनी अँखियाँ वे ॥३॥
दो नैनाँ दा तीर चलाया, मुझ आजिज१३ दे सीने लाया ।
घायल करके मुख छपाया, (तैनूँ) एह चोरियाँ किन दसियाँ१४ वे ॥४॥
मैं बंदी दा जे तू साईँ, कदी तो आवीँ फेरा पाँईँ ।
मिहर करीँ ते मुख दिखलाई, मैं काग उड़ाँदी थक्कियाँ वे ॥५
बुल्ले साह मैं मुखौँ न बोलाँ, हर सूरत बिच तैनूँ टोलाँ१५ ।
साईँ लोकाँ भेद न खोलाँ, डर दी आख१६ न सकियाँ वे ॥६
(१) व्यर्थ ऐसी प्रीत लगाई । (२) जैसा । (३) और । (४) धिक्कार है ।
(५) हटाओ । (६) अब । (७) हम से क्यों शर्म करते हो। (८) मैं अनसमझ थी ।
(९) ज़हरीला कीड़ा, बिच्छू । (१०) मैं तेरे इश्क़ में उजड़ गई । (११) अधीर ।
(१२) सुध, ख़बर । (१३) दीन । (१४) सिखलाया । (१५) ढूँढ़ा । (१६) बोल ।