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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 195, कुल 267 में से

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पृष्ठ 195

१८६ शब्द संग्रह
॥ ब्राह्मन ॥
ब्राह्मन सो जो ब्रह्म पिछानै, बाहर जाता भीतर आनै ॥१॥
पाँचौ बस करि झूठ न भाखै, दया जनेऊ हिरदे राखै ॥२॥
आतम बिद्या पढ़े पढ़ावै, परमातम का ध्यान लगावै ॥३॥
काम क्रोध मद लोभ न होई, चरनदास कहै ब्राह्मन सोई ॥४॥
॥ मिश्रित ॥
बसंत
मेरे सतगुरु खेलत नित बसंत ।
जा की महिमा गावत साध संत ॥ १ ॥
ज्ञान बिबेक के फूले फूल ।
जहाँ साखा जोग अरु भक्ति मूल ॥ २ ॥
प्रेम लता जहाँ रही झूल ।
सत संगति सागर के कूल ॥ ३ ॥
जहाँ धर्म उड़त है ज्योँ गुलाल ।
अरु चोवा चरचै निश्चै बाल ॥ ४ ॥
जहाँ सील छिमा को बरसै रंग ।
काम क्रोध को मान भंग ॥ ५ ॥
हरि चरचा जित है अनंत ।
सुनि मुक्त होत सब जीव जंत ॥ ६ ॥
आन धर्म सब जाहिँ खोय ।
राम नाम की जैजै होय ॥ ७ ॥
जहाँ अपने पिय कूँ ढूँढ़ि लेव ।
अरु चरन कँवल में सुरति देव ॥ ८ ॥
कहै चरनदास दुख दुंद जाहिँ ।
जब प्रीतम सुकदेव गहैँ बाँहिँ ॥ ६ ॥