सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 193, कुल 267 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 193

१८८ सब्द संग्रह
गुरु सुकदेव दया केरैँ, हेली मोहिँ मिलावैँ काल ।
चरनदास दुख सब भजैँ, हेली सदा रहूँ पति नाल१ ॥५॥
॥ प्रेम ॥
गुरु हमरे प्रेम पियायो हो ।
ता दिन तैं पलटो भयो, कुल गोल नसायो हो ॥ १ ॥
अमल चढ़ो गगनै लगो, अनहद मन छायो हो ।
तेज पुंज की सेज पै, प्रीतम गल लायो हो ॥ २ ॥
गये दिवाने देसड़े, आनंद दरसायो हो ।
सब किरिया सहजै छुटी, तप नेम भुलायो हो ॥ ३ ॥
त्रैगुन तैं ऊपर रहूँ, सुकदेव बसायो हो ।
चरनदास दिन रैन नहिं, तुरिया पद पायो हो ॥ ४ ॥
॥ बिनती ॥
पतित उधारन बिरद² तुम्हारे ।
जो यह बात साच है हरि जू, तौ तुम हम कूँ पार उतारे ॥१
बालपने औ तरुन अवस्था, और बुढ़ापे माहीं ।
हम से भई सभी तुम जानौ, तुम से नेक छिपानी नाहीं ॥२
अनगिन पाप भये मनमाने, नखसिख औगुन धारी ।
फिरिफिरि कै तुम सरनै आयौ, अब तुम को है लाज हमारी ॥३
सुभ करमन को मारग छूटो, आलस निद्रा घेरो ।
एकहिँ बात भली बनि आई, जग में कहायो तेरो चेरो ॥४
दीनदयाल कृपाल बिसंभर, स्री सुकदेव गुसाईँ ।
जैसे और पतित घन३ तारे, चरनदास की गहियो बाहीं ॥५
(२)
राखो जी लाज गरीब-निवाज ।
तुम बिन हमरे कौन सँवारै, सबही बिगरे काज ॥ १ ॥
(१) साथ । (२) कीर्ति, प्रण । (३) घने, अनेक ।