संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
DevanagariHindipublished267 पृष्ठ
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चरनदासजी १८३
जब तैँ मील बिछोहा हूआ, तब तैँ कछु न सुहानी ।
अंग अंग अकुलात सखी री, रोम रोम मुरझानी ॥४॥
बिन मनमोहन सबन अँधेरो, भरि भरि आवै छाती ।
चरनदास सुकदेव मिलावो, नैन भये सेंगहिँ घाती१ ॥५॥
(२)
हमारो नैना दरस पियासा हो ।
तन गयो सूखि हाय हिये बाढ़ी, जीवल हूँ वोहि आसा हो ॥१
बिछुरन थारो२ मरन हमारो, मुख मैं चलै न ग्रासा३ हो ।
नींद न आवै रैनि बिहावै४, तारे गिनत अकासा हो ॥२॥
भये कठोर दरस नहिँ जाने, तुम कूँ नेक न साँसा५ हो ।
हमरो गति दिन दिन औरे ही, बिरह बियोग उदासा हो॥३
सुकदेव प्यारे मत रहु न्यारे, आनि करो उर बासा हो ।
रनजीता६ अपनो करि जानी, निज करि चरनन दासा हो॥४
(३)
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