सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 184, कुल 267 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 184

बुल्ला साहिब १७५
जीति आया आपहीं, गुरु यारि सबद् सुनाव ।
तब दास बुल्ला भक्ति ठाना, सदा रामहिं गाव ॥ ४ ॥
॥ उपदेश ॥
(१)
बटोही खोजहु क्यौँ नहिँ आप, सुमिरहु अजपा जाप॥टेक॥
बिन खोजे कहुँ राह न पैहौ, कोटिन करहु बिलाप ॥१॥
निकटहिं राम नाम अभि अंतर, जानहि जाहि मिलाप॥२॥
हाजिर हजूर त्रिवेनी संगम, झिलमिलि नूर जो जाप ॥३॥
जन बुल्ला महबूब नूर मैं, यारी पीर१ प्रताप ॥ ४ ॥
(२)
होली
होरी खेलो रंग भरी, सब सखियन संग लगाई । टेक॥
फागुन आयो मास अनँद भो, खेलि लेहु नर नारी ।
ऐसा समय बहुरि नहिँ पैहो, जैहे जनम जुआ हारी ॥१॥
तीर त्रिवेनी होरी खेलो, अनहद डंक बजाई ।
ब्रह्मा विस्नु महेस तिनौँ जन, रहे चरन लपटाई ॥२॥
बनि बनि आवैँ दरस दिखावैँ, अदुभुत कला बनाई ।
जन बुल्ला ऐसि होरी खेले, रहे नाम लौ लाई ॥ ३ ॥
(३)
अरिल
मुरगी यह संसार चेहुँ चेहुँ करत है ।
आतम राम को नाम हृदै नहिँ धरत है ॥
बिना राम नहिँ मुक्ति झूठ सच कहत है ।
बुल्ला हृदै बिचारि राम सँग रहत है ॥
(१) गुरू ।