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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 185, कुल 267 में से

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पृष्ठ 185

केशवदास जी
[ संक्षिप्त जीवन-चरित्र के लिये देखो संतबानी संग्रह भाग १ पृष्ठ १४१ ]
॥ चितावनी ॥
कवित्त
दौलत निसान बान घरे खुदी अभिमान,
करत न दाया काहू जीव की जगत मैं ।
जानत है नीके यह फीको है सकल रंग,
गहे फिरै काल फंद मारैगो छिनक मैं ॥
घेरा डेरा गज बाजि१ झूठो है सकल साजि,
बादि२ हरि नाम कोऊ काज नाहिं अंत कै ।
बार बार कहौं तोहि छोडु मान माया मोह,
केसो काहे को करै छोभ मोह काम कै ॥
॥ प्रेम ॥
(१)
निरमल कंत संत हम पाया ।
कोटि सूर जा की निर्मल काया ॥ १ ॥
प्रेम बिलास अमृत रस भरिया ।
अनुभौ चँवर रैन दिन ढुरिया ॥ २ ॥
आनँद मंगल सोहं गावैं ।
सुख सागर प्रभु कंठ लगावैं ॥ ३ ॥
सत्य पुरुष धुनि अति उजियारी ।
कोटि भानु ससि छबि पर वारी ॥ ४ ॥
तेज पुंज निर्गुन उजियारा ।
कह केसो सोइ कंत हमारा ॥ ५ ॥
(१) घोड़ा । (२) सिवाय ।