संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
DevanagariHindipublished267 पृष्ठ
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बुल्ला साहिब १७३
जस सीप रहत समुद्र माहीं, गहत नाहिन बार¹ ।
वा की सुरत आकास लागी, स्वाँति बुंद अधार ॥ २ ॥
(जस) चकोर चन्द साँ दृष्टि लावै, अहार करत अँगार ।
दहत नाहिन पान कीन्हे, अधिक होत उजार² ॥ ३ ॥
कीट भृंग की रहनि जानो, जाति पाँति गँवाय ।
वरन अबरन एक मिलि भे, निरंकार समाय ॥ ४ ॥
(अस) दास बुल्ला आस निरखहि, राम चरन अपार ।
देहु दरसन मुक्ति परसन, आवागवन निवार ॥ ५ ॥
॥ बेहद ॥
(१)
प्रभु निराधार अधार उज्जल, बिन्दु सकल बिराजई ।
अनन्त रूप सरूप तेरो, मो पै बर्रनि न जावई ॥ १ ॥
बाँधि पवनहिँ साधि गगनहिँ, गरज गरज सुनावई ।
तहँ हंस मुनि जन चूगते मनि, रस परसि परसि अघावई ॥२
बिना कर मुख बेनु³ बाजै, बीन सत्र