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संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 179, कुल 267 में से

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पृष्ठ 179

१४० शब्द संग्रह
साचा रँग हिये उपजत नाहीँ,
भेष बनाय रँग लीन्हो कपरवा ॥ २ ॥
बिन रे भजन तोरी ई गति होइहै,
बाँधल जैबे तू जम के दुवरवा ॥ ३ ॥
दुलनदास के साइँ जगजीवन,
हरि के चरन पर हमरो लिलरवा ॥ ४ ॥
बुल्ला साहिब
[संक्षिप्त जीवन-चरित्र के लिये देखो संतवानी संग्रह भाग १ पृष्ठ १४०]
॥ गुरुदेव ॥
बलि हौँ बलि हौँ सतगुरु की ॥ टेक ॥
जिन ध्यान दियो परमेसुर को ।
त्रिकुटी संगम जिन राह निवेरी ॥ १ ॥
प्रेम बिलास अकास मैं बास है ।
आवागवन रहित भौ फेरी ॥ २ ॥
अनहद बाजे झनकार कि बानी ।
बिन सरवन तहँ सुनत है टेरी ॥ ३ ॥
बुल्ला हिरदे विचारि बोलै ।
ब्रह्म ज्ञान कि बात सुनो मेरी ॥ ४ ॥
॥ नाम ॥
साईँ के नाम की बलि जावैँ ।
सुमिरत नाम बहुत सुख पायो, अंत कतहूँ नहिँ ठाँव ॥१॥
नाम बिना मन स्वान मँजारी,१ घर घर चित लै जाँव ॥२॥
(१) कुत्ता बिल्लो ।