संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
पृष्ठ 176, कुल 267 में से
संदर्भ में पढ़ेंor similar, but the word is definitely "अंदर".
Everything is clear and verified. Formatting should follow the prompt line by line with , , etc.हर वक्त़ तसौवर मैं सूरत, सूरत अंदर झलकाया है ।
बूअली क़लंदर औ फ़रीद, तबरेज़ वही मत गाया है ॥३॥
कर सिद्क़ सबूरी लामकान, अल्लाह अलख दरसाया है ।
लखि जन दूलन जगजिवन पीर. महबूब मेरे मन भाया है॥
ख़ाविन्दख़ास ग़ैबी हजूर, वह दिल अंदर मैं आया है॥४॥
(६)
ऐसा रंग रँगैहौँ, मैं तो मतवालिन होइहौँ ॥ टेक ॥
भट्ठी अधर लगाइ, नाम की सोज१ जगैहौँ ।
पवन सँभारि उलटि दै झौँका, करकट कुमति जलैहौँ ॥१
गुरुमति लहन२ सुरति भरि गागरि, नरिया नेह लगैहौँ ।
प्रेम नीर दै प्रीति पुचारी, यहि विधि मदवा चुवैहौँ ॥२॥
अमल अगारी नाम खुमारी, नैन