संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
DevanagariHindipublished267 पृष्ठ
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दूल्लनदासजी १४५
प्रभु सुभाउ अनुहारि चाहिये, पाय चरन सेवकाई ।१
गिरगिट पौरुष करै कहाँ लगि, दौरि कँडौँरे२ जाइ ॥३॥
अब नहिँ बनत बनाये मेरे, कहत अहौँ गोहराई ।
दूल्लनदास के साँईँ जगजीवन, समरथ लेहु बनाई ॥४॥
• ॥ प्रेम ॥
(१)
धनि मोरि आज सुहागिन घड़िया ॥ टेक ॥
आज मोरे अँगना सन्त चलि आये, कौन करौँ मिहमानिया१
निहुरि निहुरि मैं अँगना बुहारौँ, मानो मैं प्रेम लहरिया ॥२
भाव कै भात प्रेम कै फुलका, ज्ञान की दाल उतरिया ॥३॥
दूल्लनदास के साँईँ जगजीवन, गुरु के चरन बलिहरिया ॥४॥
(२)
जागु री मोरि सुरत पियारी ।
चरन कमल छबि झलक निहारी ॥ १ ॥
बिसरि जाइ दे यह संसारी ।
धरहु ध्यान मन ज्ञान बिचारी ॥ २ ॥