संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
पृष्ठ 173, कुल 267 में से
संदर्भ में पढ़ें१६४ शब्द संग्रह
(५)
साईँ सुनहु बिनती मोरि ॥ टेक
बुधि बल सकल उपाय-हीन मैं, पाँयन परौँ दोऊ कर जोरि १
इत उत कतहूँ जाइ न मनुवाँ, लागि रहै चरनन माँ डोरि ॥२
राखहु दासहिँ पास आपने, कस को सकिहै तोरि ॥३॥
आपन जानि कै मेटहु मेरे, औगुन सब क्रम भ्रम खोरि¹ ॥४॥
केवल एक हितू तुम मेरे, दुनियाँ भरी लाख करोरि ॥५॥
दुलनदास के साईँ जगजीवन, माँगौँ सत दरस निहोरि ॥६॥
(६)
साईँ भजन ना करि जाइ ।
पाँच तसकर संग लागे, मोहिँ हरकत² धाइ ॥ १ ॥
चहत मन सतसंग करना, अधर बैठि न पाइ ।
चढ़त उतरत रहत छिन छिन, नाहिँ तहँ ठहराइ ॥२॥
कठिन फाँसी अहै जग की, लियो सबहिँ बझाइ ।
पास मन मनि नैन निकटहिँ, सत्य गयो भुलाइ ॥ ३ ॥
जगजिवन सतगुरु करहु दाया, चरन मन लपटाइ ।
दास दूलन बास सत माँ, सुरत नहिँ अलगाइ ॥ ४ ॥
(७)
प्रभु तुम किहेउ कृपा बरियाईँ³ ।
तुम कृपाल मैं कृपा अलायक,⁴ समुझि निवजतेहु साईँ ॥१॥
कूकुर धोये होइ न बाछा,⁵ तजै न नीच निचाई ।
बगुला होइ न मानस-बासी,⁶ बसहि जे बिषै तलाई ॥२॥
(१) कसर, ऐब । (२) रोकते हैं । (३) ज़बरदस्ती । (४) अजोग ।
(५) गऊ का बच्चा । (६) मानसरोवर का बासी ।