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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 171, कुल 267 में से

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पृष्ठ 171

१६२ शब्द संग्रह
देना लेना जो कुछ होवै, करिले अपना काम ।
आगे हाट बजार न पावै, कोइ नहिं पावै ग्राम ॥ २ ॥
काम क्रोध मद लोभ मोह ने, आन बिछाया दाम ।
क्यों मतवारा भया बावरे, भजन करो निःकाम ॥ ३ ॥
यह नर देही हाथ न आवै, चल तू अपने धाम ।
अब की चूक माफ नहि होगी, दूलन अचल मुकाम ॥ ४ ॥
(६)
राम राम रटु राम राम सुनु, मनुवाँ सुवा सलोना रे ॥टेक॥
तन हरियाले बदन¹ सुलाले, बोल अमोल सुहौना रे ॥१॥
सत्त तंत्र अरु सिद्ध मंत्र पढ़ु, सोई मृतक जियौना रे ॥२॥
सुबचन तेरे भौजल बेरे², आवागवन मिटौना रे ॥३॥
दुलनदास के साईँ जगजीवन, चरन सनेह दृढ़ौना रे ॥४॥
(७)
मन रहि जा चरनन सीस धरी, लागि रहै धुनि हरी हरी ॥१
तोहि समझावौं घरी घरी, कुमति बिपति तोरि जाय टरी ॥२
पाँच पचीसो एक करी, पियहु दरस रस पेट भरी ॥ ३ ॥
हारे बहुत बहुत रगरी³, चरन प्रीति बिन कछु न सरी ॥४॥
चरन प्रभाव जानु कुबरी⁴, परसत गौतम नारि तरी⁵ ॥५॥
साईँ जगजीवन कृपा करी, जन दूलन परतीत परी ॥६॥
॥ बिनय ॥
(१)
साईँ हो गरीब निवाज ॥ टेक ॥
देखि तुम्हें घिन लागत नाहीं, अपने सेवक कै साज ॥१॥
मोहिँ अस निलज न यहि जग कोऊ, तुम ऐसे प्रभु लाज जहाज ॥२
(१) चिहरा। (२) बेड़ा, नाव। (३) थक कर। (४) कुबजा जिसकी पीठ
का कूब श्रीकृष्ण ने अपने चरण से सीधा किया। (५) गौतम की नारी अहिल्या
जो सराप बस शिला बनी पड़ी थी और श्रीरामचन्द्र के चरण लगाने से तरी।