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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 167, कुल 267 में से

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पृष्ठ 167

१५ शब्द संग्रह
जगजिवन सतगुरु कृपा पूरन, सुफल भे जन काज ।
धनि भाग दूलनदास तेरे, भक्ति तिलक बिराज ॥ ४ ॥
(३)
मन वहि नाम की धुनि लाउ ।
रटु निरंतर नाम केवल, अवर सब बिसराउ ॥ १ ॥
साधि सूरति आपनो, करि सुवा१ सिखर२ चढ़ाउ ।
पोखि प्रेम प्रतीत तैं, कहि राम नाम पढ़ाउ ॥ २ ॥
नामही अनुरागु निसु दिन, नाम के गुन गाउ ।
बनी तौ का अबहिँ, आगे और बनी बनाउ ॥ ३ ॥
जगजिवन सतगुरु बचन साचे, साच मन माँ लाउ ।
करु बास दूलनदास सत माँ, फिरि न यहि जग आउ॥४॥
(४)
जब गज अरध नाम गुहरायो ।
जब लगि आवै दूसर अच्छर, तब लगि आपुहि धायो ॥१॥
पाँय पियादे भे करुनामय, गरुड़ासन बिसरायो ।
धाय गजंद गोद प्रभु लीन्हो, आपनि भक्ति दिढ़ायो ॥२॥
मीरा को बिष अमृतं कीन्हो, बिमल सुजस जग छायो ।
नामदेव हित कारन प्रभु तुम, मिरतक गाय जियायो ॥३॥
भक्त हेत तुम जुग जुग जनमेउ, तुमहिँ सदा यह भायो ।
बलि बलि दूलनदास नाम की, नामहिँ तैं चित लायो ॥४॥
॥ भेद ॥
(१)
साईँ तेरो गुप्त मर्म हम जानी ।
कस करि कहैँ बखानी ॥ टेक ॥
सतगुरु संत भेद मोहिँ दीन्हा, जग से राखा छानी ।
निज घर का कोउ खोज न कीन्हा, करम भरम अटकानी ॥१॥
(१) तोता । (२) पहाड़ की चोटी ।