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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 166, कुल 267 में से

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पृष्ठ 166

यहाँ प्रस्तुत पृष्ठ का पंक्ति-दर-पंक्ति देवनागरी लिप्यंतरण है:

लड़कौं के सँग लड़की जाई, ता का नाम अधोरी ।
वन मैं बैठी घर घर डोलै, स्वास्थ संग खपी री ॥ ४ ॥
पाप पुन्य दोउ पड़ पड़ोसी, अनँन वासना नाती ।
राग द्वेष का बंधन लागा, गिरह बना उतपाती ॥ ५ ॥
कोइ गृह माँडि¹ गिरह मैं बैठा, वैरागी वन बासा ।
जन दरिया इक राम भजन बिन, घट घट सँचर बासा ॥६॥
दूलनदासजी
[ संक्षिप्त जीवन-चरित्र के लिये देखो संतबानी संग्रह भाग १ पृष्ठ १३३ ]
॥ नाम महिमा ॥
(१)
कोइ बिरला यहि बिधि नाम कहै ॥ टेक ॥
मंत्र अमोल नाम दुइ अच्छर, विनु रसना रट लागि रहै ॥१॥
होठ न डोलै जीभ न बोलै, सूरति धरनि दिढ़ाइ गहै ॥२॥
दिन औ राति रहै सुधि लागी, यहि माला यहि सुमिरन है ॥३
जन दूलन सत