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संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 164, कुल 267 में से

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पृष्ठ 164

दरिया साहिब (मारवाड़ वाले)
॥ भेद ॥
पतिव्रता पति मिली है लाग ।
जहँ गगन मँडल में परम भाग ॥ टेक ॥
जहँ जल बिन कँवला बहु अनंत ।
जहँ बपु¹ बिन भौंरा गोह² करंत ॥ १ ॥
अनहद बानी अगम खेल ।
जहँ दीपक जरै बिन बाती तेल ॥ २ ॥
जहँ अनहद सबद है करत घोर ।
बिन मुख बोलै चात्रिक मोर ॥ ३ ॥
बिन रसना गुन उदत³ नार ।
बिन पग पातर निरतकार⁴ ॥ ४ ॥
जहँ जल बिन सरवर भरा पूर ।
जहँ अनँत जोत बिन चंद सूर ॥ ५ ॥
बारह मास जहँ रितु बसंत ।
ध्यान धरैं जहँ अनँत संत ॥ ६ ॥
त्रिकुटी सुखमन चुवत छीर ।
बिन बादल वरखै मुक्ति नीर ॥ ७ ॥
अमृत धारा चलै सीर⁵ ।
कोइ पीवै बिरला संत धीर ॥ ८ ॥
ररंकार धुन अरूप एक ।
सुरत गही उनहीं की टेक ॥ ९ ॥
जन दरिया बैराट चूर ।
जहँ बिरला पहुँचे संत सूर ॥ १० ॥
) शरीर । (२) गुंजार । (३) गाती है। (४) वेश्या नाचती है। (५) ठंडी ।