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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

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दरिया साहिब (माड़चार वाले। १५३
कौन झुलावै कौन भूलहिँ हो, कौन बैठालि खाट ।
कौन पुरुष नहिँ झूलहिँ हो, कौन रोकै बाट ॥ ४ ॥
मन रे झुलावै जिव भूलहिँ हो, सक्ति बैठालि खाट ।
सत्त पुरुष नहिँ झूलहिँ हो, कुमति रोकै बाट ॥ ५ ॥
सुर नर मुनि सब झूलहिँ हो, झूलहिँ तीनि देव ।
गनपति फनपति¹ झूलहिँ हो, जोगि जती सुकदेव ॥६॥
जीव जंतु सब झूलहिँ हो, झूलहिँ आदि गनेस ।
कल्प कोटि लै झूलहिँ हो, कोइ कहै न सँदेस ॥ ७ ॥
सत्त सब्द जिन पावल हो, भयो निर्मल दास ।
कहै दरिया दर देखिय हो, जाय पुरुष के पास ॥ ८ ॥
दरिया साहिब (मारवाड़ वाले)
[संक्षिप्त जीवन-चरित्र के लिये देखो संतवानी संग्रह भाग १ पृष्ठ १२६]
॥ नाम ॥
नाम बिन भाव करम नहिँ छूटै ॥ टेक ॥
साध संग औ राम भजन बिन, काल निरंतर लूटै ॥ १ ॥
मल सेती जो मल को धोवै, सो मल कैसे छूटै ॥ २ ॥
प्रेम का साबुन नाम का पानी, दुइ मिलि ताँता टूटै ॥ ३ ॥
भेद अभेद भरम का भाँडा, चौड़े परि परि फूटै ॥ ४ ॥
गुरुमुख सबद गहै उर अंतर, सकल भरम से छूटै ॥ ५ ॥
राम का ध्यान धरहु रे प्रानी, अमृत का मैँह बूटै² ॥६॥
जन दरियाव अरप दे आपा, जरा मरन तब टूटै ॥ ७ ॥
(१) शेष नाग । (२) बरसै ।
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