संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
DevanagariHindipublished267 पृष्ठ
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१५२ शब्द संग्रह
नाम निर्गुन निर्लेप निर्मल बरै ।
एक से अनँत सब जगत सारा ॥ २ ॥
पढ़ि बेद कितेब बिस्तार वक्ता कथै ।
हांरि बेचून वह नूर न्यारा ॥
निर्पँच निर्बान निःकर्म निःभर्म वह ।
एक सर्बज्ञ सत नाम प्यारा ॥ ३ ॥
तजु मान मनी करु काम को काबू१ यह ।
खोजु सतगुरु भरपूर सूरा ॥
असमान कै बुन्द गरकाब२ हूआ ।
दरियाव की लहरि कहि बहुरि मूरा३ ॥ ४ ॥
(२)
भीतर मैलि चहल४ कै लागी, ऊपर तन का धोवै है ॥१॥
अविगति मूरति महल के भीतर, वा का पंथ न जोवै है ॥२॥
जुगुति बिना कोइ भेद न पावै, साधुसंगति का गोवै है ॥३
कह दरिया कुटने रे गीदी५, सीस पटकि का रोवै है ॥४॥
॥ मिश्रित ॥
सत सुकृत दूनौँ खंभा हो, सुखमनि लागलि डोरि ।
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