संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदरिया साहिब (बिहार वाले) १५१
अठदल कँवल सुरति लौ लाय ।
अजपा जपि के मन समुझाय ॥ २ ॥
भँवरगुफा मैं उलटि जाय ।
जगमग जोति रहे छवि छाय ॥ ३ ॥
बंक नाल गहि खैंचे सूत ।
चमके बिजुली जोती बहुत ॥ ४ ॥
सेत घटा चहुँ ओर घनघोर ।
अजरा जहवाँ होय अँजोर ॥ ५ ॥
अमिय कँवल निज करै बिचार ।
चुवत बुन्द जहँ अमृत धार ॥ ६ ॥
छव चक्र खोजि करै निवास ।
मूल चक्र जहँ जिव को बास ॥ ७ ॥
काया खोजि जोगी भुलान ।
काया बाहर पद निरबान ॥ ८ ॥
सतगुर सबद जो करै खोज ।
कहैं दरिया तब पूरन जोग ॥ ६ ॥
॥ उपदेश ॥
(१)
पेड़ को पकरु तब डारि पालो मिलै ।
डारि गहि पकर नहिं पेड़ याग¹ ॥
देख दिब दृष्टि अस्मान में चन्द्र है ।
चन्द्र की जोति अनगिनित तारा ॥ १ ॥
आदि औ अंत सब मध्य है मूल मैं ।
मूल मैं फूल धौं केति डारा ॥
(१) हे यार पेड़ पकड़ने से डाल पत्ती भी मिल जायगी पर डाल के पकड़ने
से पेड़ नहीं हाथ आवैगा ।