संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
पृष्ठ 158, कुल 267 में से
संदर्भ में पढ़ेंदरिया साहिब (बिहार वाले) १४६
॥ प्रेम ॥
तुम मेरो साँई मैं तेरो दास, चरन कँवल चित मेरो बास ॥१॥
पल पल सुमिराँ नाम सुबास, जीवन जग मैं देखो दास ॥२॥
जल मैं कुमुदिनि चन्द अकास, छाड़ रहा छत्रिपहुपबिलास ॥३
उनमुनि गगन भया परगास, कह दरिया मेटा जम त्रास' ४
॥ विनय ॥
(१)
अब के बार बकस मोरे साहिब ।
तुम लायक सब जोग हे ॥ १ ॥
गुनह१ बकसिहै सब भ्रम नसिहै ।
रखिहै आपन पास हे ॥ २ ॥
अच्छै बिरिछि तरि लै बैठैहै ।
तहवाँ धूप न छाँह हे ॥ ३ ॥
चाँद न सुरज दिवस नहिँ तहवाँ ।
नहिँ निसु होत बिहान हे ॥ ४ ॥
अमृत फल मुख चाखन दैहै ।
सेज सुगन्धि सुहाय हे ॥ ५ ॥
जुग जुग अचल अमर पद दैहै ।
इतनी अरज हमार हे ॥ ६ ॥
भौसागर दुख दारुन मिटि है ।
छुटि जैहै कुल परिवार हे ॥ ७ ॥
कह दरिया यह मंगल मूला ।
अनूप फुलै जहाँ फूल हे ॥ ८ ॥
(२)
मैं जानहुँ तुम दीन-दयाल ।
तुम सुमिरे नहिँ तपत काल ॥ १ ॥
(१) पाप, दोष ।