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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 139, कुल 267 में से

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पृष्ठ 139

जगजीवन साहिब
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[संक्षिप्त जीवन-चरित्र के लिये देखो संतबानी संग्रह भाग १ पृष्ठ ११७]
॥ चितावनी ॥
(१)
अरे मन देहु तजि मतवारि ।
जे जे आये जगत महँ इहि, गये ते ते हारि ॥ १ ॥
नाँहिँ सुमिर्यौ नाम काँ, सब गये काम बिगारि ।
आपु काँ जिन बड़ा जान्यो, काल खायो मारि ॥ २ ॥
जानि आपुहिँ छोट जग, रहि रहौ डोरि सँभारि ।
बैठि कै चौगान निरखहु, रूप छवि अनुहारि१ ॥ ३ ॥
रहौ थिर सतसंग बासी, देहु सकल बिसारि ।
जगजिवन सतगुरु कृपा करि, लेहिँ सबै सँवारि ॥ ४ ॥
(२)
अरे मन समुझि करु पहिचान ।
को तैँ अहसि कहाँ तैँ आयसि, काहे भर्म भुलान ॥१॥
सुधि सँभारु बिचार करिकै, बूझु पाछिल ज्ञान ।
नात यहि दुइ चारि दिन का, अचल नहिँ अस्थान ॥२॥
लोक गढ़ यहु कोट काया, कठिन माया बान ।
लाग सब के बचे कोउ नहिँ, हन्यो सब को ध्यान ॥३॥
खबरदार बेखबर हो नहिँ, ओट नाम निरबान ।
जगजिवन सतगुरु राखि लैहैँ, चरन रहु लपटान ॥४॥
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(१) सदृश।