संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
DevanagariHindipublished267 पृष्ठ
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धरनी दासजी १२७
धरनी जिव झिलमलित दीप ज्येाँ,
होत अँधार करै उँजियारे ॥ ४ ॥
॥ प्रेम ॥
(१)
इक पिय मोरे मन मान्यो, पतिव्रत ठानौँ हो ।
अवरो जो इन्द्र समान, तौ तृन करि जानौँ हो ॥१॥
जहँ प्रभु बैसि सिँहासन, आसन डासब हो ।
तहवाँ बेनियाँ डोलइबौँ, बड़ सुख पइबौँ हो ॥२॥
जहँ प्रभु करहिँ लवासन¹, पवढ़हिँ आसन हो ।
कर तैँ पग सुहरैबौँ, हृदय सुख पइबौँ हो ॥३॥
धरनी प्रभु चरनामृत, नितहिँ अछइबौँ हो ।
सन्मुख रहिबौँ मैं ठाढ़ि, अंते नहिँ जइबौँ हो ॥४॥
(२)
पिया मोर बसैँ गउरगढ़¹, मैं बसौँ प्राग² हो ।
सहजहिँ लागु सनेह, उपजु अनुराग हो ॥१॥
असन