सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 135, कुल 267 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 135

१२६ शब्द संग्रह
जग आये जंगल परे सुनु रे मन बौरे,
भरम रहे अरुझाई रे ॥ ३ ॥
पर की पीर न जानिया सुनु रे मन बौरे,
नाहक छुरी चलाई रे ।
बाँधि जँजीरे जाइहौ सुनु रे मन बौरे,
बहुरि ऐसहौँ जाई रे ॥ ४ ॥
सतगुरू कै उपदेस ले सुनु रे मन बौरे,
दोजख दरद मिटाई रे ।
मानुष देह दुर्लभ अहै सुनु रे मन बौरे,
धरनी कह समुझाई रे ॥ ५ ॥
॥ बिरह ॥
अजहुँ मिलो मेरे प्रान-पियारे ।
दीनदयाल कृपाल कृपानिधि,
करहु छिमा अपराध हमारे ॥ १ ॥
कल न परत अति बिकल सकल तन,
नैन सकल जनु१ बहत पनारे ।
माँस पचो अरु रक्त रहित भे,
हाड़ दिनहुँ दिन होत उघारे ॥ २ ॥
नासा नैन