संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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१२६ शब्द संग्रह
जग आये जंगल परे सुनु रे मन बौरे,
भरम रहे अरुझाई रे ॥ ३ ॥
पर की पीर न जानिया सुनु रे मन बौरे,
नाहक छुरी चलाई रे ।
बाँधि जँजीरे जाइहौ सुनु रे मन बौरे,
बहुरि ऐसहौँ जाई रे ॥ ४ ॥
सतगुरू कै उपदेस ले सुनु रे मन बौरे,
दोजख दरद मिटाई रे ।
मानुष देह दुर्लभ अहै सुनु रे मन बौरे,
धरनी कह समुझाई रे ॥ ५ ॥
॥ बिरह ॥
अजहुँ मिलो मेरे प्रान-पियारे ।
दीनदयाल कृपाल कृपानिधि,
करहु छिमा अपराध हमारे ॥ १ ॥
कल न परत अति बिकल सकल तन,
नैन सकल जनु१ बहत पनारे ।
माँस पचो अरु रक्त रहित भे,
हाड़ दिनहुँ दिन होत उघारे ॥ २ ॥
नासा नैन