संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
DevanagariHindipublished267 पृष्ठ
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सुंदरदासजी ११६
(२)
न्याय सास्त्र कहत है, प्रगट ईसुरवाद ।
मीमांसाहि सास्त्र माहिँ, कर्मवाद कह्यो है ॥
वैसेषिक सास्त्र पुनि, कालवादी है प्रसिद्ध ।
पातंजलि सास्त्र माहिँ, योगवाद लह्यो है ॥
सांख्य सास्त्र माहिँ पुनि, प्रकृति पुरुष वाद ।
वेदांत जु सास्त्र तिन, ब्रह्मवाद गह्यो है ॥
सुंदर कहत षटसास्त्र, माहिँ भयो वाद ।
जा के अनुभव ज्ञान, वाद मैं न बह्यो है ॥
(३)
काहू कूँ पूछत रंक, धन कैसे पाइयत ।
कान देके सुनत, स्रवण सोई जानिये ॥
उन कह्यो धन हम, देख्यो है फलानी ठौर ।
मनन करत भयो, कब घर आनिये ॥
फेरि जब कह्यो धन, गड़्यो तेरे घर माहिँ ।
खोदन लाग्यो है तब, निदिध्यास ठानिये ॥
धन निकस्यो है जब, दारिद गयो है तब ।