सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसंत नामदेव : व्यक्तित्व और रचनाएँ ७६
मिश्र¹ तथा मेकलिफ² भी यही मत रखते हैं।
(२) सोलापुर जिले की बार्शी के पास :—ऐसा भी एक मत प्रस्तुत किया
जाता है कि नरसी ब्राह्मणी सोलापुर जिले की बार्शी के पास है। गाथा में बार्शी का
उल्लेख दो बार आया है—
(१) बारसी भगवन्त तेरसी तिळया । विट्ठलु सोयरीया पांडुरंगा ॥
अभंग १७५३।
यह अभंग विष्णुदास नामा का है संत नामदेव का नही ।
(२) द्वादशीच्या गावी जाहला उपदेश । देवावीण ओस स्थल नाही ।
अभंग १३६१
इस अभंग से इतना ही पता चलता है कि बिसोबा खेचर ने नामदेव को बार्सी
के भगवंत के मंदिर मे उपदेश किया।
परन्तु सोलापुर जिले में नरसी अथवा नरसी ब्राह्मणी अथवा नरसी बामणी
नाम का गांव आज भी नही है और पहले होने का प्रमाण उपलब्ध नही होता ।
(३) मराठवाडा के परभणी जिले में :—कुछ वर्ष पहले तक अर्थात् सं०
१९२६ ई० तक नरसी ब्राह्मणी को जिला सातारा में माना जाता था। पर १९२६ में
पूना के भारत इतिहास संशोधक मंडल की त्रैमासिक पत्रिका मे श्री० केशवराव कोरटकर
का एक लेख छपा जिसमें बताया गया कि नरसी ब्राह्मणी गांव मराठवाडा के परभणी
जिले में है। तब से लगभग सभी विद्वान् परभणी जिले की नरसी ब्राह्मणी को नामदेव
का जन्मस्थान मानने लगे है। श्री पांगारकर, डॉ० शं० गो० तुलपुले, न्यायमूर्ति
केशवराव कोरटकर, डॉ० हे० वि० इनामदार आदि इसी मत के समर्थक है।
श्री पांगारकर के अनुसार 'नरसी बामणी मोगलाई में परभणी जिले मे है।'³
डॉ० शं० गो० तुलपुले भी इस विषय में श्री पांगारकर से सहमत है—'उनका
(नामदेव का) पिता दामा शेट शिंपी मूलतः परभणी प्रांत के नरसी बामणी गाँव का
रहने वाला था।'⁴
१. 'बम्बई अहाते के सातारा जिलान्तर्गत नरसी बमनी ग्राम में नामदेव का जन्म
हुआ।'
—संत नामदेव और हिन्दी पद साहित्य, पृ० ६० ।
2. 'Namdev was the son of Damasheti, a tailor who resided at
Narsi Bamani, a village near Karad'.
—Sikh Religion Vol. VI, p. 17.
३. मराठी वाङ्मयाचा इतिहास (खंड पहला) पृ० ५५५ ।
४. पाँच संत कवी, पृ० १३७ ।