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सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 75, कुल 332 में से

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पृष्ठ 75

'श्री नामदेव चरित्र' के लेखक श्री माधव अप्पाजी मुले के अनुसार—'श्री
नामदेव महाराज के वंश का मूल पुरुष यदुशेट था। यह जाति का 'शिंपी' (दर्जी)
था और उसका उपनाम रेलेकर था। यह कराड के निकट कृष्णा-तट पर नरसी
ब्राह्मणी नामक एक देहात का रहने वाला था। इसी देहात को बहे नरसिंगपूर अथवा
कोले नरसिंगपूर कहा जाता है।'१
बहे नरसिंगपूर अथवा कोले नरसिंगपूर को ही नामदेव की नरसी मानकर तथा
वहाँ के दैवत श्री नरसिंह का नामदेव के घराने के साथ सम्बन्ध दिखाते हुए स्व०
पाटसकर लिखते हैं—
'नामदेव के पूर्वजों का कुल दैवत श्री नरसिंह था। वहां की समाधि नामदेव
की न होकर उनके पूर्वजो की है जो नरसिंह के परम भक्त थे।'२
डॉ० आनन्दप्रकाश दीक्षित भी नरसी को कराड के पास मानने के पक्ष में हैं।
वे स्पष्टतया लिखते हैं—'यों तो कराड के पास की नरसी बमनी में उनके पूर्वज की
समाधि भी है और इससे उनका मूलस्थान वह अधिक सिद्ध हो सकता है।'३
इस विषय में डॉ० बडथ्वाल,४ आचार्य रामचन्द्र शुक्ल,५ आचार्य विनयमोहन
शर्मा,६ आचार्य परशुराम चतुर्वेदी,७ डॉ० रामकुमार वर्मा,८ डॉ० रामचन्द्र

१. श्री नामदेव चरित्र (पुनर्मुद्रण, सन् १९५२), पृ० २७
२. बालभक्त श्री नामदेव महाराज दरोडेखोर होते काय ? पृ० १३
३. नामदेव का कृतित्व : 'राष्ट्रवाणी'
—अक्तूबर नवम्बर १९७०,—पृ० ११२
४. 'नामदेव का जन्म सातारा जिले के नरसी बमनी गाँव में एक शैव परिवार में
हुआ था।' —हिन्दी काव्य में निर्गुण संप्रदाय, पृ० ६५।
५. 'ये दक्षिण के नरसी वमनी (सातार जिला) के दरजी थे।
—हिन्दी साहित्य का इतिहास, पृ० ६८।
६. 'नामदेव ने नरसी ब्राह्मणी गांव में जन्म धारण किया।'
—हिन्दी को मराठी संतों की देन, पृ० ६८।
७. 'इनका (नामदेव का) जन्म सातारा जिले के अन्तर्गत कन्हाड के निकटवर्ती किसी
नरसी बमनी गाँव में हुआ था।'
—उत्तरी भारत की संत परम्परा, पृ० १०६।
८. 'क्योकि नामदेव का कुटुम्ब पहले नरसी बामणी गाँव (कन्हाड-सातारा) में ही
निवास करता था। बाद में वह पंढरपुर में आ बसा था, जहाँ नामदेव का जन्म
हुआ।' —हिन्दी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास, पृ० २३६।