सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 77, कुल 332 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 77

८० नामदेव की हिन्दी कविता
न्यायमूर्ति केशवराव कोरटकर के अनुसार 'नरसी पुरानी हैदराबाद रियासत के
(आज के महाराष्ट्र राज्य के) परभणी जिले के हिंगोली तालुके में है। ब्राह्मणी नाम का
गाँव वहाँ नहीं है। अलबत्ता बामणी नामक एक गाँव है जो नरसी से दस कोस पर है।
यह भी इसी परभणी जिले में है। ये दोनों गाँव परस्पर कैसे संबद्ध हुए यह कहा नहीं
जा सकता। औंढ्या नागनाथ का मंदिर नरसी से पाँच कोस पर है। नामदेव-चरित्र में
ऐसा उल्लेख पाया जाता है कि नामदेव प्रतिदिन नागनाथ के दर्शन के लिए जाया करते
थे। नामदेव का नागनाथ के दर्शन के लिए प्रतिदिन नरसी से औंढ्या जाना सम्भव है
परन्तु नरसी को यदि हम बार्शी के पास मानें तो नामदेव का नित्य नागनाथ के दर्शन
के लिए जाना युक्ति-संगत नहीं लगता क्योंकि बार्शी से औंढ्या नागनाथ ४० कोस अथवा
उससे भी अधिक दूरी पर है। मेरा अपना गाँव कसबा कोरट है जो औंढा से तीन कोस
पर है। मेरे गाँव ही में नहीं तो हमारे इलाके में सभी इसी नरसी को नामदेव की नरसी
समझते हैं।'¹
डॉ० हे० वि० इनामदार² श्री० केशवराव कोरटकर के मत का समर्थन कर
नरसी को मराठवाड़ा के परभणी जिले में ही मानते हैं। वे निम्नलिखित तर्क उपस्थित
कर नरसी को वराड के पास मानने वालों के मत का खण्डन करते हैं--
(१) दामा शेट का विट्ठल का उपासक होने का गाथा में³ उल्लेख है परन्तु
उनके नरसिंह के भक्त होने का कहीं निर्देश नहीं पाया जाता। प्रस्तुत अभंग प्रक्षिप्त है।
उसी में नामदेव की डकैती का भी उल्लेख है।
(२) नरसिंह का मंदिर नरसिंगपूर में है और केशवराज की मूर्ति तांबवे में है।
(३) श्री पाटसकर के अनुसार नरसिंगपूर के पास नदी तट पर जो समाधि है
वह सिद्धेश्वर महाराज के बड़े बेटे की है। वह समाधि नामदेव के पूर्वजों की नहीं है।
नरसी का मराठवाड़े में होने का एक और प्रमाण
महाराष्ट्र शासन के प्रकाशन विभाग ने 'महाराष्ट्र के जिले · परभणी' नामक एक
पुस्तक बम्बई से प्रकाशित की है। इसमें औंढ्या नागनाथ, नरसी और बामणी इन तीन
गाँवों का स्वतन्त्र रीति से उल्लेख किया गया है।
१. 'नामदेवाची नरसी', पृ० १२०-१२१ ।
—भारत इतिहास संशोधक मंडल, त्रैमासिक पत्रिका, वर्ष ७ वाँ, अंक १-४ ।
२. संत नामदेव डॉ० हे० वि० इनामदार, पृ० ३० ।
३. नरसी ब्राह्मणीचा दामा शेट शिपी ।
केशीराज रूपी मग्न असे ।
—आवटे प्रत, अभंग १२४५ ।