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सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 58, कुल 332 में से

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पृष्ठ 58

संत नामदेव : व्यक्तित्व और रचनाएँ ६१
गुरु ग्रन्थ साहब के पद महाराष्ट्रीय तथा ज्ञानदेव कालीन नामदेव के ही है। वे
अपने जीवन के उत्तर काल में पंजाब गये और वही लगभग २० वर्ष तक रहे। वास्तव
में बात यह है कि अपने परम मित्र ज्ञानेश्वर के समाधि लेने के पश्चात् पंढरपुर से
उनका मन उचट गया और कुछ दिनो के पश्चात् वे पंजाब की ओर चले गये। वहाँ
गुरदासपुर जिले के धोमान ग्राम में रह कर भजन-कीर्तन करते रहे। उनके समाधि-
स्थान के बारे मे दो मत हैं। पंजाबी परंपरा के अनुसार उन्होंने घोमान में ही समाधि
ली। पर नामदेव के शिष्य परिसा भागवत के एक अभंग¹ के अनुसार सन् १३५० ई०
में पंढरपुर में ही उनके समाधि लेने की बात पुष्ट होती है। आज भी घोमान में बाबा
नामदेवजी का गुरु द्वारा है और उनके अनुयायियों की संख्या भी बहुत बड़ी है।
महाराष्ट्रीय संत नामदेव और गुरु ग्रन्थ के नामदेव एक ही है, इस सम्बन्ध में
निम्नलिखित बातें विचारणीय है। सबसे पहली बात यह है कि नामदेव के जन्म स्थान
और वंश के सम्बन्ध में दोनों परम्पराओ में साम्य है। नामदेव के जीवन सम्बन्धी जो
घटनाएं तथा उनके चमत्कार महाराष्ट्र में प्रचलित है अथवा उनके अभंगो मे मिलते है,
वही घटनाएं और चमत्कार पंजाबी परम्परा मे भी प्रचलित हैं और हिन्दी के पदों में
भी प्राप्त हैं। मृत गाय को जिलाने, विट्ठल को दूध पिलाने, मन्दिर का द्वार फिराने
आदि की घटनाएं दोनों रचनाओ में समान रूप में प्राप्त होती हैं। पंजाबी परंपरा के
अनुसार गुरु ग्रन्थ के नामदेव भिन्न नही बल्कि महाराष्ट्रीय संत नामदेव ही है।²
दूसरी बात यह है कि हिन्दी पदो और मराठी अभंगों मे विट्ठल शब्द के उपयोग
के साथ साथ केशव, माधव, राम, गोविन्द, हरि आदि शब्दों का समान रूप से व्यवहार
हुआ है। हिन्दी के कवियो ने विट्ठल का प्रयोग कही नही किया है। विट्ठल महाराष्ट्र
के देवता है और सन्त नामदेव उन्हो के भक्त थे। इसलिए प्रधान रूप से विट्ठल शब्द
का प्रयोग हुआ है। इसके अतिरिक्त हिन्दी तथा मराठी पदो का वर्ण्य-विषय एक न होते
हुए भी सामान्य बातें—ईश्वर की सर्वव्यापकता, नाम और गुरु का महिमा वर्णन,
बाह्याडम्बरों की व्यर्थता तथा प्रह्लाद, ध्रुव, अजामिल आदि प्राचीन भक्तो के कथा सन्दर्भ
लगभग एक से ही हैं।
पंजाबी और महाराष्ट्रीय संत नामदेव के एक होने का सबसे बड़ा प्रमाण है
१. आषाढ़ शुक्ल एकादशी । नामा विनवी विठ्ठलासी ।
आज्ञा व्हावी हो मजसी । समाधि विश्रांति लागी ॥
—सकल संत गाथा
२. (अ) हिन्दी को मराठी संतो की देन, पृ० १०६ ।
(ब) भगत नामदेव जी जनम साखी : ज्ञानी करतार सिंह ।