सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
पृष्ठ 307, कुल 332 में से
संदर्भ में पढ़ेंनामदेव का साहित्य पर प्रभाव ३१५
कबीर साहब कहते हैं कि मैं अनेक बार कह चुका हूँ। ब्रह्मा और महेश भी
कह चुके हैं कि यदि प्राणि के मोक्ष का कोई साधन है तो वह केवल तत्त्व-रूप राम का
नाम है। वही प्रत्येक मनुष्य के लिए उचित उपदेश है।¹
यदि संसार में ईश्वर भक्ति और भजन है तो वह केवल राम के नाम का स्मरण
करना ही है। इसके अतिरिक्त जो अन्य उपायों से भक्ति का प्रदर्शन करते हैं वह सब
दुःख का कारण है। कबीरदास कहते हैं कि इसीलिए मन, वचन और कर्म से तत्त्व-
स्वरूप ब्रह्म का स्मरण करना चाहिए।²
संत रैदास नाम-महिमा का वर्णन इस प्रकार करते हैं—'नाना प्रकार के
आख्यान, पुराण, वेद-विधि आदि वर्णमाला के चौंतीस अक्षरों के अन्तर्गत ही आते हैं।
व्यास ने ठीक ही कहा है कि ये सब राम-नाम की समता नहीं कर सकते।'³
संत दादू 'सुमिरण' के अनन्य महत्त्व का प्रतिपादन करते हुए कहते हैं—
'निरंतर नाम-स्मरण करने से एक दिन परमात्मा का साक्षात्कार होगा। 'सुमिरण' का
यह सहज मार्ग सद्गुरु ने मुझे बता दिया।'⁴
गुरु नानक नाम-स्मरण पर अपना अविचल भाव व्यक्त करते हुए कहते हैं—
'मेरा आधे शरीर काट दीजिये अथवा सिर पर करवत चलाइये अथवा हिमालय में मेरे
शरीर को गला दीजिये तो भी मेरा मन तुम्हारा गुण-गान करता रहेगा। मैने यह
१. कबीर कहै मैं कथि गया, कथि गया ब्रह्म महेस।
राम नाँव तत सार है, सब कोहू उपदेस॥
—कबीर ग्रन्थावली, पृ० ५।
२. भगति भजन हरि नांव है, दूजा दुक्ख अपार।
मनसा वाचा क्रमनां, कबीर सुमिरण सार॥
—कबीर ग्रन्थावली, पृष्ठ ५।
३. नाना खिआन पुरान वेद विधि चउतीस अषर मांही।
विआस बिचारि कहिउ परमारथु राम नाम सरि नाही।
—संत काव्य, पृष्ठ १६५।
४—सासै सास सँभालता इक दिन मिलिहै आइ।
सुमिरण पँडा सहज का सतगुर दिया बताइ॥
—संक्षिप्त संत सुधा-सार, पृष्ठ २७६।