सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३१४ नामदेव की हिन्दी कविता
मैंने अपने भीतर ही ब्रह्मानन्द रूपी घृत खा लिया और हृष्ट पुष्ट हो गया ।'१
संत रज्जब ने गुरु को 'नीर क्षीर' विवेकवाला हंस कहा है "माया रूपी पानी
तथा दूध रूपी मन भली भाँति एकरूप हो गये। संत रज्जब कहते हैं कि गुर रूपी हंस
इन दोनों को एक दूसरे से अलग कर देता है ।'२
(४) सुमिरन अथवा नाम स्मरण का महत्त्व—नामदेव ने 'सुमिरन' को बहुत
महत्त्व दिया है। सर्वसाधारण जनता के लिए भी यह साधन सुलभ है। इस पर कुछ
खर्च नही करना पड़ता। अत नाम स्मरण पर नामदेव का आग्रह है। वे कहते हैं—
'हे परमात्मा ! तुम्हारी कृपा से पत्थर समुद्र पर तैर उठे थे । फिर तुम्हारा स्मरण
करने से भक्त भला भवसागर क्यो न तर जायेंगे ?'३
'हरि नाम की महिमा अपार है। वही तो इस विश्व में सार तत्व है। नामदेव
कहते हैं कि इसी का आधार लेकर मैं भवसागर पार हुआ।'४
'तुम्हारा नाम सार-स्वरूप सत्य है। सारा संसार मायाजाल है। कलियुग में
भक्तो के लिए केवल तुम्हारा नाम एकमात्र आधार है ।'५
नाम के इस महत्त्व का अनुभव कर नामदेव कहते हैं कि राम-नाम रूपी पूँजी
म मेरी लो लगी है ।⁶
१. साचा समरथ गुर मिल्या, तिन तत दिया बताइ ।
दादू मोट महाबली घटि घृत मधि करि पाई ॥
—संत काव्य, पृ० २५६ ।
२. माया पानी दूध मन मिले सु मुहुकम संधि ।
जन रज्जब बलि हंस गुरु सोधि लही सो संघि ॥
—संत काव्य, पृ० ३३५ ।
३. देवा पाहन तारिअलै । राम कहत जन कस न तरे ॥
—सत नामदेव की हिंदी पदावली, पद १४६ ।
४. हरि नाव सकल भुवन सतसारा ।
हरि नाव नामदेव उतरे पारा ॥
—संत नामदेव की हिन्दी पदावली, पद १ ।
५. सार तुम्हारा नांव है झूठा सब संसार ।
मनसा वाचा कर्मना कलि केवल नांव अधार ॥
—संत नामदेव की हिंदी पदावली, पद ५१ ।
६. राम नाम मेरे पूँजी घनां ।
ता पूँजी मेरी लागौ मना ॥ टेक ॥
—संत नामदेव की हिंदी पदावली, पद १२८ ।