सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१४ नामदेव की हिन्दी कविता
वात्सल्य रस का विश्लेषण
स्थायी भाव —सन्तान विषयक प्रेम
आलंबन —नामदेव
आश्रय —विट्ठल
उद्दीपन —नामदेव का रूठना,
विट्ठल से दूध पीने के लिए हठ करना ।
अनुभाव —नामदेव का पुलकित होना, विलाप करना,
विट्ठल से बातें करना, आह भरना ।
संचारी —निर्वेद, ग्लानि, शंका, दीनता आदि ।
नामदेव भक्त और भगवान् का सम्बन्ध माता और बालक का-सा मानते हैं । वे
कहते हैं—'हे विट्ठल ! तू मेरी मैया है और मैं तेरा बालक हूँ । मुझे स्तन पान करा ।'¹
'विट्ठल रूपी माता पुत्र वत्सल है । उसका अन्तःकरण बहुत कोमल है । उसका
स्मरण करते ही वह अपने भूखे बालक को स्तन पान कराती है ।'²
अपने एक हिन्दी पद में नामदेव कहते हैं—'बालक यदि रोदन भी करे तो
माता उसको विष कैसे पिला सकती है ?'³
'मेरो माता तथा पिता तू ही है । हे हरि !