सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 183, कुल 332 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 183

१८८ नामदेव की हिन्दी कविता
तथा केशव ही नामदेव है। दोनो एक दूसरे से अभिन्न हैं। हम में (और मुझ में)
द्वैत भाव नहीं है। नामदेव कहते हैं—मैने अपना सर्वस्व तुम्हारे पदकमलों पर अर्पित
कर दिया है।'१
सर्वं खलु इदं ब्रह्म
ईश्वर का साक्षात्कार होने पर नामदेव कहने लगे—'जिधर देखता हूँ उधर
वही एक ईश्वर है जो सर्वव्यापक और सर्वपूरक है। तरंग, फेन और बुद्बुदा जैसे जल
से भिन्न नहीं हैं वैसे ही यह प्रपंच (संसार) ब्रह्म की लीला है और उससे अभिन्न है।
इस संसार में जीव के रूप में ईश्वर के अतिरिक्त कोई अन्य विचरण नही करता है।
नामदेव कहते हैं—रे मानव ! ईश्वर की सृष्टि को अपने हृदय में विचार कर देख,
एक ईश्वर ही घट-घट और चराचर में समान रूप से व्याप्त है।'२
यही 'सर्वं खलु इदं ब्रह्म' महावाक्य की अनुभूति है। नामदेव को सब ओर हरि
चरण दिखाई देने लगे। उनका मन उन्मन हुआ। वासनाएँ ईश्वर में विलीन हुईं।
'सब कुछ ब्रह्म है' की उनको अनुभूति हुई।
निष्काम बुद्धि से राम का जप करने पर राम का साक्षात्कार होता है। भक्त
स्वयं राम हो जाता है। उसको सारा संसार राममय दिखाई देता है। वह आवा-
गौन के फेर से मुक्त हो जाता है जैसे दूध से घी बनने पर वह दूध में परिवर्तित नहीं
हो सकता।
'भगवान से भक्त और भक्त से भगवान है। अद्वैत का यही खेल भक्त और
भगवान के बीच हो रहा है। स्वयं ही देवता, स्वयं ही भक्त तथा स्वयं पुजारी होकर

१. केशवाचे प्रेम नामयाचि जाणे । नाम्या हृदयीं असणें केशवातें ॥
नामा तो केशव, केशव तो नामा । अभिन्नत्व आम्हां केशवासी ।
नामा म्हणे केशवा दुजेपण नाही। परि प्रेम तुझ्या ठायो ठेवियेले ।
—सकल संत गाथा, अभंग १२५६ ।
२. सभु गोबिंदु है सभु गोबिंदु है गोबिंदु बिनु नहि कोई ।
जल तरंग अरु फेन बुदबुदा जल तें भिन्न न कोई ॥
इहु पर पंचु पारब्रह्म की लीला विचरत आन न होई ॥
कहत नामदेउ हरि की रचना देखहु रिदै विचारी ॥
घट घट अंतरि सरब निरंतरि केवल एक मुरारी ॥
—सं० ना० हि० प०, पद १५० ।