रोगों की पहचान
Rogon Ki Pehchaan
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
रोगों से बचे रहने के पाँच सर्वोत्तम फार्मूले
रोगों से बचे रहने के पाँच
सर्वोत्तम फार्मूले
पाँच चीजें स्वास्थ्य के मामले में अपनाओगे तो रोग आपके पास आयेंगे ही नहीं।
नाम-भजन करना
सर्व रोग की औषध नाम
नाम सभी प्रकार के रोगों की औषधी है। इतना ही नहीं, यह नाम जन्म-मरण रूपी महारोग का भी नाश करने वाला है।
सतगुरु शब्द सहाई।
निकट गये तन रोग न व्यापे, पाप ताप मिट जाई॥
शरीर के रोग भी नहीं आयेंगे। नाम रक्षा करता है। पर शर्त है कि गुरु के शब्द का उल्लंघन न हो।
यह नाम रोगों का नाश कैसे करता है, इसे समझते हैं। पहले समझना होगा कि रोगों का मुख्य कारण क्या है।
जैसे डाक्टर आँख के रोग में दूषित पदार्थ के जमाव को नहीं समझ पाते हैं, वो आँखों का इलाज करने लगते हैं। वो आँख के परे की गहराई में नहीं जा पाते, गंदे पदार्थ की तरफ उनका कोई ध्यान नहीं होता। ऐसे ही नजूरिया वैद्य भी केवल दूषित पदार्थ तक ही पहुँच पाते हैं। डॉ० आँख तक ही रहा, उसके लिए आँख ही रोग की जड़ है। अन्य-अन्य चिकित्सा पद्धतियाँ अपनी-अपनी तरह से रोग की जड़ बताती हैं। आयुर्वेद शरीर में कफ, पित्त और वायु की मात्रा में असंतुलन को रोग की जड़ मानता है।
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साहिब बदरी
सभी अपने-अपने तरीके से रोग की जड़ बता रहे हैं, पर रोगों की असली जड़ को कोई भी नहीं जानता है। वो जड़ है-मन। यह एक परम रहस्य है।
मन के पाँच हाथ हैं-काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार। ये पाँचों से ही भयंकर शारीरिक रोग उत्पन्न होते हैं। उदाहरण के लिए जिसमें काम अधिक है, उसे टी.बी. होने की पूरी-पूरी संभावना रहती है। इन सबको काबू करने के लिए सदगुरु नाम देता है। इसलिए नाम ही वास्तव में सब रोगों का नाश करने वाला है। जो नाम करने वाला है, उसे रोग आयेंगे ही नहीं।
व्यायाम
व्यायाम जैसा पीछे कहा गया, वैसा ही करना। यह भी रोगों को पास में नहीं आने देता है, शरीर में मौजूद दूषित द्रव्य को पसीने के द्वारा बाहर कर देता है।
मूली पपीते का सेवन
यदि आप भोजन के द्वारा अपने स्वास्थ्य को ठीक रखना चाहते हैं तो सबसे पहले तो आप सुबह खाली पेट मूली, पपीते और खीरे का सेवन शुरू कर दें। लोगों को किसी चीज़ के खाने का सही समय भी मालूम नहीं है। अधिकतर लोग मूली और खीरा रात को ही खाते हैं। यह परम हानिकारक हो जाता है। इस फार्मूले को सदैव याद रखें-
खीरा सुबह हीरा दिन को खीरा रात को पीड़ा।
मूली सुबह पूली दिन को मूली रात को सूली।।
यानी खीरा सुबह के समय खायेंगे तो हीरे की तरह लाभकारी सिद्ध होगा, यदि दिन के समय खायेंगे तो केवल खीरा ही रह जायेगा और रात को सेवन करेंगे तो वो आपको पीड़ा देने वाला सिद्ध होगा। ऐसे ही मूली भी सुबह खायी तो उत्तम है, दिन के समय मध्यम और रात को खाना तो समझो कि अपने को सूली पर चढ़ाने के बराबर है।
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उपवास रखना
यह उपवास भी जैसा पीछे सरल उपाय में कहा गया है, वैसा ही रखना। जैसे किसी मशीन से काम लेने के बाद समय-समय पर आप उसकी सफाई करते हैं, ताकि वो ठीक से काम करती रहे, लंबे समय तक चले। आप उसकी सर्विस करवाते हैं। ऐसे ही इस शरीर में जो पाचन-क्रिया की मशीनें हैं, उन्हें भी सफाई की जरूरत पड़ती है। भोजन के अंश जहाँ-तहाँ फँस जाते हैं, जिन्हें निकालने के लिए पीछे बताई गयी विधि के अनुसार 10 दिन में एक बार व्रत रख लेना चाहिए।
हमारा च्यवनप्राश खाना
यह हमारा च्यवनप्राश खाना इसलिए कहा कि हमारे च्यवनप्राश की बात ही सबसे निराली है। जो च्यवनप्राश हम बनाते हैं, मेरा दावा है कि दुनिया में कोई नहीं बना पायेगा। जिस च्यवन ऋषि ने इसे सबसे पहले बनाया था, वो भी ऐसा नहीं बना पाया था। क्योंकि इसमें मैंने सांसारिक बूटियाँ ही नहीं मिलायी हैं, एक अलौकिक बूटी भी मिलायी है। इसलिए बोल रहा हूँ कि ऐसा च्यवनप्राश कोई नहीं बना पायेगा।
यह हर रोग की दवा है। यहाँ तक कि विरोधी रोगों को भी यह ठीक कर देगा। यानी यदि आपको उच्च रक्तचाप होगा तो कम कर देगा और यदि निम्न रक्तचाप होगा तो बढ़ा देगा। यह आपका स्टेमिना भी बढ़ायेगा। यह आपको आलसी भी नहीं बनने देगा। ऐसा है यह च्यवनप्राश। जोड़ों के दर्द में यह लाजवाब है, आँखों की नज़र से पक्का बढ़ायेगा, खाँसी को जड़ से मिटा देगा, साँस की बीमारी होगी तो उसका नामोनिशान भी नहीं रहेगा। सार यह है कि शरीर के रोम-रोम को यह च्यवनप्राश चेतन कर देता है। आप जल्दी बूढ़े भी नहीं होंगे। यह मत सोचना कि कहीं व्यवसाय के लिए है। नहीं, 100 के करीब डिब्बे तो महीने में ऐसे ही मुफ्त में बाँट देता हूँ और फिर है भी बहुत ही सस्ता। इतना सस्ता कहीं
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साहिब बन्दगी
नहीं होगा। फिर इसकी शुद्धता का क्या कहना! एक और बड़ी बात यह कि इसमें हम कोई केमिकलस भी नहीं डाल रहे हैं और न ही कोई मिलावट कर रहे हैं। आप हमारे बच्चे ही तो हैं। जैसे माता-पिता को बच्चों की फिकर होती है, ऐसे ही हमें भी आपकी फिकर है। इसलिए आपके लिए यह परम औषधी बनायी है। इसके सेवन में तीन बातें ध्यान में रखना—
- 1. भोजन के बाद एक चम्मच दिन में दो बार ले सकते हैं।
- 2. बच्चों और बूढ़ों को आधा चम्मच ही खिलाएँ।
- 3. च्यवनप्राश खाने के आधे घण्टे बाद तक पानी मत पिएँ।
कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर।
न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर ॥