रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७४ असली कोकशास्त्र
न बहुत छोटा, और न लम्बा सामान्य कद वाला, ब्राह्मण
और गुरु-भक्त, परायी औरत को न चाहने वाला, परोपकारी,
स्वभाव वाला शशक पुरुष कहलाता है ।
साधू-i सङ्गमे चैव अनुगामी समुत्सुकः ।
लक्षणैर्लक्षितः श्रीमान् शशोऽयं देवपूजकः ॥
सत्पुरुषों की संगति करने वाला, सदाचारयुक्त, धनवान
देवताओं का पूजक शशक पुरुष कहाता है ।
गम्भीर वचनः शा तः न पापे विद्यते मनः ।
इतितॆ कथितं ब्रह्मन् शशकस्य च लक्षणम् ॥
गम्भीर वचन बोलने वाला, शान्ति-प्रिय, हमेशा पाप से दूर
रहने वाला शशक पुरुष कहाता है ।
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मृग पुरुष
वदति मधुरवाणीं दीर्घनेत्रोऽतिभीरु-
श्चपलमतिसुदेहः शीघ्रवेगो मृगोऽयम् ॥
विशाल नेत्र, मधुर भाषी, अत्यन्त डरपोक, बुद्धि-चपल,
सुन्दर शरीर वाला, तथा शीघ्र दौड़ने वाला पुरुष मृग संज्ञक
कहाता है ।
स्मितास्यः स्निग्धगात्रश्च बहाशी बलवान्सदा ।
नृत्यगीतप्रियो ब्रह्मन् मृगोऽयं पुरुषः स्मृतः ।