सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 74, कुल 440 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 74

असली कोकशास्त्र ७५
चिकनी देह वाला, हँसमुख, बहुभक्षी, बलवान, नृत्य और
गान को चाहने वाला, मृग पुरुष कहाता है ।
भवति कमलनेत्रः पद्मगन्धः सवेषः ।
उपकृतिपरधीरो नित्यमोदी मृगोऽयम् ॥
कमल-नयन, कमल के समान गन्धवाला, सुन्दर वेष-भूषा
वाला, धीर, परोपकारी हमेशा आनन्द में रहने की इच्छा वाला
पुरुष मृग संज्ञक होता है ।
मृगस्येव महाभाग, दृष्टि स्यात् चपला सदा ।
बह्वाशी गुरुदेवेषु भक्तिमान् नियतं भवेत् ॥
जिसकी दृष्टि चञ्चल मृग के समान हो, बहुत भोजन करने
वाला, ईश्वर भक्त, गुरु भक्त, मृग पुरुष कहाता है ।
वृषभ पुरुष
खेलत्सिंहपदक्रमा मृदुगिरः
पीडासहास्त्यागिनो
निद्रासक्तिभृतस्त्रपा विरहिता
दीप्ताग्नयः श्लेष्मलाः
मध्यान्ते सुखिनोऽतिमज्जवपुषः
सञ्चार मेदोऽधिकाः
सर्वस्त्री सुभगा नवांगुलमितं
लिङ्गं वृषोविभ्रति ॥