रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ७५
चिकनी देह वाला, हँसमुख, बहुभक्षी, बलवान, नृत्य और
गान को चाहने वाला, मृग पुरुष कहाता है ।
भवति कमलनेत्रः पद्मगन्धः सवेषः ।
उपकृतिपरधीरो नित्यमोदी मृगोऽयम् ॥
कमल-नयन, कमल के समान गन्धवाला, सुन्दर वेष-भूषा
वाला, धीर, परोपकारी हमेशा आनन्द में रहने की इच्छा वाला
पुरुष मृग संज्ञक होता है ।
मृगस्येव महाभाग, दृष्टि स्यात् चपला सदा ।
बह्वाशी गुरुदेवेषु भक्तिमान् नियतं भवेत् ॥
जिसकी दृष्टि चञ्चल मृग के समान हो, बहुत भोजन करने
वाला, ईश्वर भक्त, गुरु भक्त, मृग पुरुष कहाता है ।
वृषभ पुरुष
खेलत्सिंहपदक्रमा मृदुगिरः
पीडासहास्त्यागिनो
निद्रासक्तिभृतस्त्रपा विरहिता
दीप्ताग्नयः श्लेष्मलाः
मध्यान्ते सुखिनोऽतिमज्जवपुषः
सञ्चार मेदोऽधिकाः
सर्वस्त्री सुभगा नवांगुलमितं
लिङ्गं वृषोविभ्रति ॥