रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ७३
अल्पाहारी, अहंकार रहित, सम्भोग में जल्दी तृप्त होनेवाला,
धनवान, कान्तिवान, हमेशा प्रसन्न रहने वाला, शशक पुरुष
कहलाता है।
आताम्रस्फारनेत्रा लघु समदशना वस्तुर्लास्याः
सुवेषाः । मृद्वारक्तं वहन्तः करमतिललितं श्लिष्ट
शाखं सुवाच ॥ वृत्तव्यालोललीलाः सुमृदुशिरसिजा
नातिदीर्घा वहन्तो । ग्रीवां जानूरुहस्ते जघन चरणयो-
र्बिभ्रतः कार्श्य॑मुच्चैः ॥
बड़ी और सुर्ख आँख वाला, छोटे किन्तु समान दाँत वाला,
तिल मुख और सुन्दर प्रकृति वाला विच्छिन्न उगुलियों वाला सुन्दर
मुलायम और लाल हाथ वाला निरन्तर भोग की इच्छा रखनेवाला,
और जिसके सिर के बाल मुलायम हों, तथा जिसकी गर्दन चौड़ी
और नाटी हो, जिसके हाथ, पाँव तथा जंघायें लम्बी हों, उसे
शशक पुरुष जानो ।
मृदुवचनसुशीलः कोमलाङ्गः सुकेशः ।
सकलगुणनिधानः सत्यवादी शशोऽयम् ॥
मीठा बोलने वाला, सुशील, कोमलाङ्गी, सुन्दर केश वाला, सर्व
गुण सम्पन्न सत्यवादी शशक पुरुष कहलाता है ।
न खर्वो नातिदीर्घश्च गुरुद्विजपरायणः ।
विमुखः परदारेषु सदा परहिते रतः ॥