रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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कर बोयेगा, सस्ता नहीं। ऐसा क्यों ? उससे पूछिये । वह
साफ कह देगा कि भविष्य में होने वाली मेहनत-मसक्कत इसी
पर निर्भर है, यदि इस में किसी प्रकार की कोतायी की जायगी
तो आने वाले साल में भूखों मरना पड़ेगा। यदि बीया अच्छा
नहीं होगा तो फसल कहाँ से अच्छी होगी। इसी पर तो
फसल का दारोमदार है। जब गाय भैंस गाभिन कराने का
समय आयेगा तब भी अच्छे से अच्छा हृष्ट-पुष्ट मजबूत साँड़
ढूँढ़ा जायगा। इस विषय में अनाड़ी से अनाड़ी ग्रामीणी भी
एक मत हैं फिर बुद्धिमानों का तो कहना ही क्या ? किन्तु बड़े
खेद की बात है, जो मनुष्य इतना बुद्धिमान बनता है वह अपनी
सन्तान के लिए कुछ भी विचार नहीं करता। मनुष्य होकर
इसने क्या विशेषता की, इससे तो पशु भी अच्छे हैं, जो समय
आने पर ही सन्तानोत्पत्ति की चेष्टा करते हैं। उनकी सन्तान
कैसी हृष्ट-पुष्ट सुन्दर फुर्तीली और तन्दुरुस्त होती है। सुन्दर
निरोग और बलिष्ट सन्तान बनाने के लिये ही वेदशास्त्रों ने
विवाह का समय विभाग किया था। जिसका दिग्दर्शन ऊपर
किया जा चुका है।