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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 66, कुल 440 में से

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असली कोकशास्त्र ६७
गँवार तथा मूर्ख बतलाते हैं। इसमें सन्देह नहीं जो अनाज
उसकी पैदा की हुई सफल में सब से घटिया प्रायः शहर में न
बिकने लायक होता है वह उसी को बड़े प्रेम से खाकर निर्वाह
करता है। गाय भैंस का दूध जो उसके घर में होता है, वह
उसे कभी नहीं पीता प्रत्युत बेंच कर दाम खड़े कर लेता है
और यदि न बिका तो उसको जमाकर उसका घी निकाल कर बेंच
देता है। मट्ठा (छाँछ) स्वयं बाल-बच्चों समेत पीता है।
चौबीस घण्टा लगातार महीनों परिश्रम करने के बाद जो वस्तु
पैदा की जाय, भोजन के समय उसका निष्कृष्टतम (खराब)
भाग काम में लाया जाय यह बुद्धिमान्य नहीं तो ओर क्या
है ? किन्तु वही मन्द-बुद्धि किसान जिस समय खेत बोने का
समय आता है, उस समय खेत की भूमि मुलायम बनाने के
लिये हल चलाता, पटरा फेरता और सब भूमि समान कर
डालता है। जब तक जमीन बोने योग्य नहीं हो जाती तब तक
उसमें बीज नहीं बोता। जब भूमि तैयार हो जाती है तब जो
बीज घर में से निकलता है। वह बीज उसकी फसल का
सब से अच्छा, पुष्ट मोटा भरा हुआ चमकीला गठा हुआ अनाज
होता है, जिसे वह प्राणों से भी बढ़कर सँभाल कर रखता है।
यहाँ तक कि कर्ज काढ़ कर खायेगा किन्तु उसे नहीं छुएगा
और उसको बड़ी रक्षा करेगा। यदि घर में न हो तो बाजार से
एक रुपये का एक डेढ़ दो सेर तक मँहगे से मँहगा खोज-खरीद