रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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स्त्रियों के ही साथ बीतता है। जैसा माता-पिता के संस्कार पुत्र
पर पड़ते हैं वैसा ही पुत्र बनता है। इस के बाद परिवर्त्तन करना
बड़ा ही कठिन है।
इस समय जैसी बिना पढ़ी-लिखी मूर्खा नारियें गृहिणी
बनी हुई हैं वैसा ही दुर्दशा गृहस्थ की भी है। न घर का
हिसाब-किताब ठीक है न बच्चों की हालत। हो भी कहाँ से ?
न तो पढ़ी-लिखी हैं न शिक्षिता। वाममार्गियों ने तो स्त्रियों
को कामवासना पूरा करने का साधन मात्र समझ लिया और
ऐसी कपोल-कल्पित श्रुतियें बना कर स्त्री जाति का पढ़ाना ही
रोक दिया है। अर्थात्—
स्त्री शूद्रो नाधीयाताम् ।
स्त्री औत शूद्र को न पढ़ाना चाहिये। जब स्त्रियों का पढ़ाना
रुक गया तब पुरुष भी मूर्ख रहने लगे। क्योंकि जैसा साँचा
होगा वैसी ही चीज बनेगी। जिस समय स्त्रियों के पढ़ने का
अधिकार नहीं छिना था; उस समय वीर-विदुषी ब्रह्म-वादिनी
उपदेष्ट्री नारियाँ होती थीं। उस समय वैसी ही उनकी सन्तानें
भी होती थीं। उसी समय के चरित्र को देख कर ही महात्मा
मनु ने भरतेतर देशों को चेतावनी दी थी कि—
एतद्देशप्रसूतस्य सकाशादग्रजन्मनः ।
स्वं स्वं चरितं शिक्षेरन् पृथ्व्यां सर्वमानवः ॥