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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 53, कुल 440 में से

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पृष्ठ 53

५४ असली कोकशास्त्र
पति-पत्नि की योग्यता
सच्ची गृहिणी वही होती है जो घर के करने योग्य कार्यों
को स्वयं करे और नौकरों से लेने योग्य कार्यों को नौकरों से
ले। खाद्य पदार्थों को स्वयं बनाये। आय-व्यय का हिसाब-
किताब रखे। घर में कौन वस्तु है और कौन सी घट गयी
इस पर भी ध्यान रखे। बालकों की सफाई, खान-पान का
ख्याल तथा उनकी पढ़ाई, शिक्षा आदि का प्रबन्ध करे। समय
विभाग बनाकर उन्हें पढ़ाये और बुरी संगत में न जाने दे। शास्त्रीय
धार्मिक शिक्षा देती रहे। वेद मन्त्र तथा नीति के शिक्षाप्रद
श्लोक कण्ठ कराये। पाँच वर्ष की उमर तक बच्चे को मारे-
पीटे नहीं, बल्कि प्रेम प्रलोभन से काम ले। बच्चों के स्वास्थ्य
का विशेष ध्यान रक्खे। ऐसी कोई बात मुँह से न निकलने दे
जिसका प्रभाव उन पर बुरा पड़े। ये काम सुशिक्षित विदुषी गृहि-
णयों के हैं। वे जैसी चाहें वैसी सन्तान बना सकती हैं। अर्थात
त्यागी, धर्मात्मा, वीर, साहसी, योद्धा कर्मवीर बनावें या हिजड़ा,
डरपोक, झूठा, लवार, लम्पट, हिंसक दुराचारी बनावें। बच्चों
का यह नर-शरीर रूपी खिलौना उन्हीं की प्रतिकृति (तसवीर)
स्वरूप होता है। जैसा वे स्वयं बनती हैं, वैसा ही सन्तान को
बनाती हैं। पाँच वर्ष की आयु तक बालक का मन, बचन,
शरीर आइने की भाँति स्वच्छ होता है, वहाँ तक का काल