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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 55, कुल 440 में से

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पृष्ठ 55

५४ असली कोकशास्त्र
डंके की चोट से सभी देश देशान्तरों को मनु भगवान ने
चैलेञ्ज दिया था कि अय पृथ्वी के सम्पूर्ण मनुष्यो ! तुम
अपने अपने चरित्रों को भारतवर्ष के उत्पन्न अग्रजन्मा (ब्राह्मणों)
से सीखो।
उपरोक्त सिंहनाद से स्पष्ट प्रतीत होता है कि इस देश के
शिक्षक उपदेष्टा इतने प्रवल-विद्वान् शस्त्रास्त्रवेत्ता, तार्किक,
नीतिज्ञ तथा सर्वशास्त्र पारंगत थे कि जिनका मुकाबिला कोई
अन्यदेशीय मनुष्य नहीं कर सकता था। किन्तु आज ठीक
उसके विपरीत दिखायी देता है। उनकी विद्वत्ता उन्हीं को खा
रही है, उनकी नीति उन्हीं के नाश का हेतु बन रही है। जिन
आर्य्य सन्तानों पर भरोसा रखकर उपरोक्त दावा किया गया
था वे शिक्षा ग्रहण करने के लिये दूसरे देशों की ओर लालायित
दृष्टि से देख रहे हैं। ऐसा क्यों ? क्या महात्माओं के वचन मिथ्या
अभिमानपूर्वक होते हैं ? ऐसा होना सर्वथा असम्भव है। क्योंकि
उन्हीं महात्मा मनु का वचन है—
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयान्न ब्रूयात्सत्यमप्रियम् ।
प्रियं च नानृतं ब्रूयादेषः धर्मः सनातनः ॥
सत्य बोलो, प्रिय बोलो। अप्रिय सत्य मत बोलो। किन्तु
प्रिय-झूठ भी मत बोलो। यहीं सनातन धर्म है। ऐसे महा-
त्माओं की चेतावनी मिथ्या कैसे हो सकती है। जो मीठे झूठ