रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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भी शायद ही कोई इनके पीने से परहेज करता हो । शराब से
हजारों घर धूल में मिल गये । लाखों आदमियों का सत्यानाश हो
चुका । शराबी को किसी बात का ज्ञान नहीं रहता । प्रायः वह
माता, स्त्री और लड़की का भेद तक भूल जाता है । शराब से मनुष्य
का मेदा जल जाता है अन्त में वह पृथिवी का भार हो जाता है ।
शराबी मोरियों में पड़े नजर आते हैं अच्छा मनुष्य भी शराब से
कौड़ी का तीन हो जाता है । इस व्यसन से घिरे मनुष्य, होश-
हवास ठीक होते भी निकम्मे देख पड़ते हैं । मन पर उनका अधि-
कार नहीं होता, सदा शेखचिल्लियों के से मनसूबे बाँधा करते हैं ।
इस लिए शराब और इसी की सगी बहन भाँग दोनों चीजें बिलकुल
त्यागने योग्य हैं; इसमें दो मत नहीं हो सकते । कुछ लोग कहते हैं,
दवा की भाँति शराब पीने में कोई हर्ज नहीं । परन्तु असल में इतनी
की भी जरूरत नहीं । यूरोप—जो शराब का घर है—उन डॉक्टरों
की भी यही राय है । पहले अनेक बीमारियों में शराब काम में
आती थी, परन्तु वहाँ अब बिलकुल बन्द हो गई है । असल में तो
दवा की दलील ही निराधार है । शराब के पक्षपाती दिखाना चाहते
हैं कि जब शराब दवा के काम में आ सकती है, तब उसे पीने के
काम में लाना क्या बुरा है । परन्तु विष भी तो दवा की भाँति काम
आता है तो भी कोई उसे खुराक की भाँति बरतने का विचार
तक नहीं करता । हो सकता है, कुछ बीमारियों में शराब से लाभ
पहुँचे, पर हानि इतनी हो चुकी है कि विचारवान मनुष्य को चाहिए