रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ३६७
कि जान जाने दें, पर शराब दवा की भी न ले। शराब से इस
शरीर की भलाई होने में जहाँ सैकड़ों मनुष्यों को बुरा होता है वहाँ
ऐसे शरीर की रक्षा न कर उसे नष्ट ही हो जाने देना चाहिए।
हिन्दुस्तान में लाखों मनुष्य ऐसे हैं जो वैद्य के कहने पर भी शराब
न पीवेंगे। वे शराब पीकर वा अपनी समझ में बुरी चीजों का
प्रयोग कर जीना नहीं पसन्द करते। अफीम का विचार भी शराब
के साथ ही करना चाहिए। अफीम का नशा शराब से भिन्न है;
फिर भी उससे शराब से कम बुराई नहीं होती। अफीम के फेर में
पड़कर चीन जैसे बड़े राष्ट्र की प्रजा पायी हुई स्वतन्त्रता खो बैठी।
हमारे जागीरदार भी अफीम के चंगुल में पड़कर अपनी-अपनी
जागीरों से हाथ धो बैठे।
शराब भाँग और अफीम की बुराइयाँ तो साधारण पाठकों
की समझ में तुरन्त आ जाती हैं, और बीड़ी तम्बाकू की नहीं
आतीं। बीड़ी और तम्बाकू ने मनुष्य जाति पर अपना ऐसा असर
जमा रखा है कि उसके मिटने में एक जमाना लगेगा। छोटे-बड़े
सभी इसके फेर में पड़े हैं। अच्छे भलेमानस भी बीड़ी सिगरेट का
व्यवहार करते हैं। इनके पीने में कोई शरम नहीं समझी जाती।
मित्रों की खातिर का यह एक महान् साधन बन गई है। दिन-दिन
इनका प्रचार बढ़ता जाता है सर्वसाधारण को इस बात की खबर
नहीं कि सिगरेट का व्यसन बढ़ाने के लिए सिगरेट के व्यापारी
लोग उसकी बनावट में हजारों तरकीबें लड़ाते हैं। जर्दे तम्बाकू में