सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 407, कुल 440 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 407

असली कोकशास्त्र ३६५
सिगरेट और बीड़ी
यह दोनों चीजें बहुत ही विषधर हैं, बीड़ी की अपेक्षा सिगरेट
में दुने नशे का प्रयोग किया जाता है। एक तमाखू दूसरा अफीम,
तमाखू के पत्तों पर अफीम का पानी छिड़का जाता है यदि नशा
अधिक तेज करना हो तो अफीम के पानी में पत्ते भिगो दिये जाते
हैं जो नशा बहुत लाते हैं। “नीम चढ़े करेले” की तरह इनका
असर होता है। इनका पीनेवाला यदि इन्हें छोड़ना चाहे तो कठि-
से छोड़ पाता है। बीड़ी, तमाखू, सिगरेट, भाँग, चाय, काफी,
कोको, आदि नशीली चीजों पर अब हम विशेष और कुछ अधिक
न लिखकर सर्व देश प्रसिद्ध महात्मा गाँधी के लिखे आनुभविक
भोजन विषयक लेख का कुछ अंश यहाँ नीचे उद्धृत कर देते हैं ।
“हमें कौन सी चीज खानी चाहिए, इसके पहले यह देख लेना
आवश्यक है कि हमें कौन सी चीज न खानी चाहिए । मुख की
राह से शरीर के अन्दर जाने वाली चीजों की गिनती यदि हम
अनाज शब्द में करें तो शराब, बीड़ी, तम्बाकू, भाँग, चाय, काफी
कोको और मसाला इत्यादि भी अनाज ही है ।
मुझे अनुभव से मालूम हुआ है । यह सब चीजें छोड़ने के
लायक हैं, इनमें से कुछ चीजों का अनुभव तो खुद ही किया है,
और कुछ के सम्बन्ध में दूसरों के अनुभव से लाभ उठाया है ।
शराब और भाँग को हर धर्म दूषित ठहराया गया है। फिर