रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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गरम जल परम औषध है ।
२६—रहने का मकान हमेशा हवादार और स्वच्छ होना
चाहिए । नंगे शरीर शुद्ध वायु सेवन से अनेक रोग दूर होते हैं ।
२७—नियमित आहार-विहार करने वाला कभी रोगी नहीं
होता और हो भी जाय तो शीघ्र स्वस्थ हो जाता है ।
२८—रोग, अग्नि और ऋण ये शेष रहने पर बढ़ते ही जाते
हैं । इस लिए इनको कभी शेष न रहने दे ।
२९—"मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः" मनुष्यों का
अपवित्र मन बन्धन का हेतु है और पवित्र मन मोक्ष का कारण
है । कामदेव को मन से उत्पन्न होने के कारण ही मनोज या मन-
सिज कहते हैं । वह यदि अपवित्र मन में पैदा होता है तो तन मन
धन सभी को बरबाद कर देता है और स्वच्छ मन में पैदा होकर
वही धार्मिक सन्तान भी पैदा करता है । मन के पवित्र विचार
कामदेव को भस्म कर देते हैं । इस लिए कामदेव हमारा परम शत्रु
है । वह सम्पूर्ण व्याधियों का घर है । इस लिए सद्विचारों द्वारा
उसका विनाश कर व्याधियों से छुटकारा पाना चाहिए और स्वच्छ
मन को मोक्ष का साधन बनाना हमारा परम कर्त्तव्य है ।